संग्राम सिंह ने नेशनल स्पोर्ट्स विजन कॉनक्लेव में दिया प्रेरणादायक संदेश: “अफसोस से बेहतर है जोखिम उठाना”

भारतीय पहलवान संग्राम सिंह ने राष्ट्रीय खेल दृष्टि सम्मेलन में “चैंपियन माइंडसेट: 9 गोल्डन रूल्स” सत्र में अपनी प्रेरणादायक कहानी साझा की। उन्होंने सफलता के लिए कड़ी मेहनत, ईमानदारी, धैर्य, आत्म-विश्वास, अनुशासन और समर्पण को आवश्यक गुण बताया।

सिंह ने समाज की बदलती सोच पर प्रकाश डालते हुए पुराने मुहावरे “पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-खुदोगे तो होंगे खराब” की तुलना की और आजकल की सोच “खेलोगे-खुदोगे तो बनोगे नवाब” से की। उन्होंने युवाओं को अफसोस से बेहतर जोखिम उठाने की सलाह दी और प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सहयोग पर जोर दिया। “हमेशा जिंदगी में प्रतिस्पर्धा नहीं करना, सहयोग करना है, सबका साथ देना है,” उन्होंने कहा, एकता की शक्ति को उजागर करते हुए।

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संग्राम सिंह के प्रेरणादायक सत्र के अलावा सम्मेलन में कई अन्य महत्वपूर्ण सत्र भी हुए, जिनमें:

  • “मेंटल टफनेस: परफॉर्मेंस को दबाव में कैसे नियंत्रित करें” – डॉ. अनुराधा सोलंकी
  • “मूवमेंट को मास्टर करना: खेल बायोमैकेनिक्स का विज्ञान” – डॉ. तरुण सचदेवा, डॉ. वेरना डी सिल्वा, और सार्थक प्रभाकर
  • “मोशन का विज्ञान: परफॉर्मेंस मास्ट्री के लिए बायोमैकेनिक्स” – डॉ. राहुल तिवारी
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यह सम्मेलन विशेषज्ञों और खिलाड़ियों को एक मंच पर लाकर खेल मनोविज्ञान, बायोमैकेनिक्स, और खेल में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए आवश्यक मानसिकता पर महत्वपूर्ण चर्चा का अवसर प्रदान करता है।

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